मैनपुरी की करहल मंडी में आलू की बंपर आवक: कोल्ड स्टोरेज हाउस फुल होने से किसान परेशान, प्रशासन से नए स्टोरेज और सब्सिडी की मांग
मैनपुरी। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य भागों में आलू उत्पादन के प्रमुख गढ़ माने जाने वाले मैनपुरी जिले की करहल मंडी में इन दिनों आलू की भारी बंपर आवक हो रही है। जिले भर के खेतों से किसान अपनी उपज ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर दिन-रात मंडी पहुंच रहे हैं। लेकिन बंपर पैदावार के बावजूद किसानों के चेहरे पर खुशी के बजाय चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही हैं। इसका मुख्य कारण जिले के अधिकांश कोल्ड स्टोरेज (शीत गृह) का समय से पहले ही पूरी तरह से ‘हाउस फुल’ हो जाना है। कोल्ड स्टोरेजों के बाहर ट्रकों और ट्रैक्टरों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं, और किसान अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
कोल्ड स्टोरेजों के बाहर तीन-तीन दिनों तक इंतजार कर रहे किसान
करहल और उसके आस-पास के क्षेत्रों में स्थित कोल्ड स्टोरेजों की क्षमता इस वर्ष आलू के बंपर उत्पादन के सामने बौनी साबित हो रही है। किसानों का आरोप है कि कोल्ड स्टोरेज के मालिक मनमाने ढंग से किराया वसूल रहे हैं और पहचान वाले या बड़े व्यापारियों के आलू को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। छोटे और मध्यम वर्ग के किसान अपनी ट्रॉलियों में आलू भरकर कोल्ड स्टोरेज के बाहर तीन-तीन दिनों से खुले आसमान के नीचे खड़े हैं। चिलचिलाती धूप और गर्मी के कारण आलू के सड़ने का खतरा बढ़ गया है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका सता रही है।
मंडी में गिरते दाम और बिचौलियों का आतंक
कोल्ड स्टोरेज में जगह न मिलने के कारण मजबूरन किसानों को अपना आलू खुले बाजार और स्थानीय मंडियों में बहुत कम दामों पर बेचना पड़ रहा है। करहल मंडी में बिचौलिए और आढ़ती किसानों की इस मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। कुछ दिन पहले तक जो आलू उचित दामों पर बिक रहा था, उसके भाव अब काफी नीचे आ गए हैं। किसानों का कहना है कि कम दामों पर आलू बेचने से उनकी लागत मूल्य भी नहीं निकल पा रही है, जिससे वे कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं। खाद, बीज, पानी और मजदूरी की बढ़ती लागत के बीच आलू के गिरते दामों ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप और कोल्ड स्टोरेज मालिकों के साथ बैठक
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कृषि अधिकारी और उपजिलाधिकारी (SDM) ने संयुक्त रूप से करहल क्षेत्र के कई कोल्ड स्टोरेजों का औचक निरीक्षण किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने कोल्ड स्टोरेज संचालकों के साथ एक आपातकालीन बैठक बुलाई और उन्हें सख्त निर्देश दिए कि किसानों के आलू भंडारण में किसी भी प्रकार की पक्षपातपूर्ण नीति न अपनाई जाए। प्रशासन ने निर्देश दिया कि प्रत्येक कोल्ड स्टोरेज के बाहर उपलब्ध भंडारण क्षमता का बोर्ड लगाया जाए और पारदर्शिता के लिए टोकन व्यवस्था लागू की जाए। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि किसानों का शोषण करने वाले कोल्ड स्टोरेज मालिकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उनके लाइसेंस निरस्त किए जा सकते हैं।
नए शीत गृहों की स्थापना और सरकारी सब्सिडी की मांग
भारतीय किसान यूनियन और स्थानीय कृषक संगठनों ने सरकार से मैनपुरी जिले में सरकारी कोल्ड स्टोरेजों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। किसान नेताओं का कहना है कि निजी शीत गृहों के भरोसे किसानों को नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार को सहकारी मॉडल पर नए और आधुनिक कोल्ड स्टोरेजों का निर्माण कराना चाहिए, जहां रियायती दरों पर किसानों के लिए भंडारण की सुविधा हो। इसके अलावा, आलू उत्पादक किसानों के लिए विशेष परिवहन सब्सिडी की भी मांग की गई है ताकि वे अपना आलू बाहरी राज्यों और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों में आसानी से भेज सकें। किसानों ने सरकार से आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करने की भी पुरजोर वकालत की है ताकि उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके।