राजस्थान के थार मरुस्थल में स्थापित होंगे नए पवन ऊर्जा संयंत्र: अक्षय ऊर्जा उत्पादन में देश का नेतृत्व करेगा राज्य
थार के मरुस्थल में अक्षय ऊर्जा का महाअभियान
सूर्य की तेज किरणों और मरुस्थलीय हवाओं के वरदान से समृद्ध राजस्थान अब देश में अक्षय ऊर्जा का सबसे बड़ा उत्पादक बनने की ओर अग्रसर है। राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा निगम ने जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर जिलों के थार मरुस्थल क्षेत्र में नए विशाल हाइब्रिड पवन और सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की मंजूरी दे दी है। इसके तहत मरुस्थल के विशाल भूभाग पर आधुनिक विंड टरबाइन (पवन चक्की) और सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। इन नए संयंत्रों के पूरी तरह से काम शुरू करने के बाद राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता में कई हजार मेगावाट की अतिरिक्त वृद्धि होगी, जिससे राजस्थान ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन जाएगा।
तकनीकी विकास और ग्रीन ग्रिड कॉरिडोर
उत्पादित हरित ऊर्जा को बिना किसी नुकसान के देश के अन्य राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा) तक पहुंचाने के लिए एक विशेष ‘ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर’ ग्रिड का निर्माण किया गया है। इस आधुनिक ट्रांसमिशन लाइन के माध्यम से अतिरिक्त बिजली को राष्ट्रीय ग्रिड में ट्रांसफर किया जाएगा। नई हाइब्रिड तकनीकों के उपयोग से हवा और धूप दोनों का एक साथ दोहन किया जा रहा है, जिससे भूमि का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो रहा है। सरकार इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र के बड़े निवेशकों को भी आकर्षित कर रही है, जिससे राज्य में भारी निवेश आ रहा है।
स्थानीय समुदायों का सामाजिक-आर्थिक विकास
मरुस्थलीय क्षेत्रों में पवन ऊर्जा परियोजनाओं के आने से बुनियादी ढांचे जैसे सड़कों, पानी की आपूर्ति और स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से विकास हुआ है। बंजर जमीनों पर इन संयंत्रों के लगने से किसानों को जमीन का अच्छा किराया मिल रहा है। इसके साथ ही, टरबाइनों की देखरेख और निर्माण कार्यों में हजारों स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है। पर्यावरणविदों के अनुसार, कोयला आधारित बिजली की जगह इस स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से देश के पर्यावरण को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। राजस्थान का मरुस्थल अब देश की रोशनी का मुख्य स्रोत बन रहा है।