फिरोजाबाद के कांच उद्योग पर ऊर्जा संकट का साया: गैस आपूर्ति में कमी से उत्पादन 40% तक घटा, लाखों श्रमिकों के रोजगार पर खतरा
फिरोजाबाद:
भारत के “ग्लास सिटी” के रूप में दुनिया भर में प्रसिद्ध उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद शहर का कांच उद्योग इन दिनों एक गंभीर संकट से गुजर रहा है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण शहर के कांच कारखानों को प्राकृतिक गैस (RLNG) की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस संकट के चलते क्षेत्र में कांच का उत्पादन लगभग 40 प्रतिशत तक गिर गया है, जिससे सीधे तौर पर यहां काम करने वाले लाखों दिहाड़ी मजदूरों और कारीगरों की आजीविका पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
वैश्विक तनाव और गैस आपूर्ति में कटौती:
फिरोजाबाद का कांच उद्योग पूरी तरह से रीगैसिफाइड लिक्विफाइड नेचुरल गैस (RLNG) पर निर्भर है। कांच को पिघलाने वाली भट्टियों को चालू रखने के लिए लगातार 1000 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान की आवश्यकता होती है। यदि इन भट्टियों को एक बार भी ठंडा होने दिया जाए, तो उन्हें दोबारा शुरू करने में लाखों रुपये का खर्च आता है और भट्टियां क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे हालिया संघर्षों और लाल सागर (Red Sea) मार्ग में व्यवधानों के कारण प्राकृतिक गैस के आयात में भारी कमी आई है। इसके परिणामस्वरूप गैस की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है और आपूर्ति में कटौती की गई है।
ताज ट्रैपेजियम जोन (TTZ) की सीमाएं:
ताजमहल की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित ताज ट्रैपेजियम जोन (TTZ) नियमों के तहत फिरोजाबाद के उद्योग केवल पर्यावरण-अनुकूल ईंधन (जैसे प्राकृतिक गैस) का ही उपयोग कर सकते हैं। वे कोयले या लकड़ी जैसे पारंपरिक ईंधनों का उपयोग नहीं कर सकते। ऐसे में, गैस की कमी होने पर उनके पास उत्पादन बंद करने या कम करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचता है। स्थानीय उद्यमियों का कहना है कि गैस संकट के चलते वे ऑर्डर समय पर पूरे नहीं कर पा रहे हैं।
लाखों परिवारों के रोजगार पर संकट:
फिरोजाबाद में लगभग 400 पंजीकृत कांच इकाइयां हैं, जो देश के कुल कांच उत्पादन का लगभग 70% हिस्सा संभालती हैं। इनमें चूड़ियों के निर्माण से लेकर कलात्मक सजावटी सामान, झूमर, घरेलू बर्तन और प्रयोगशाला के उपकरण बनाए जाते हैं। इस उद्योग से लगभग 4 से 5 लाख लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। उत्पादन में गिरावट के कारण कारखानों ने अपने कार्य शिफ्टों को घटा दिया है, जिससे दिहाड़ी मजदूरों को काम मिलना बंद हो गया है। निर्यातकों के अनुसार विदेशी मांग होने के बावजूद शिपिंग लागत में वृद्धि और उत्पादन की कमी के कारण निर्यात में भी करीब 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग:
कांच उद्योग से जुड़े प्रमुख संगठनों और उद्यमियों ने केंद्र व राज्य सरकार से इस संकट में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उद्यमियों की मांग है कि उन्हें विशेष कोटे के तहत रियायती दरों पर गैस उपलब्ध कराई जाए और ताज ट्रैपेजियम जोन में उद्योगों के लिए कुछ वैकल्पिक ईंधन उपयोग करने की अस्थायी अनुमति दी जाए। अगर जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सदियों पुराना यह पारंपरिक कांच उद्योग पूरी तरह ठप हो सकता है, जिससे न केवल आर्थिक नुकसान होगा बल्कि भारी बेरोजगारी भी फैलेगी।