वन्यजीव संरक्षण में मध्य प्रदेश का देश में दबदबा: बाघ, चीता, तेंदुआ, भेड़िया, घड़ियाल और गिद्धों की संख्या में नंबर-1 राज्य
भोपाल। वन्यजीवों के संरक्षण और उनकी आबादी के मामले में मध्य प्रदेश ने एक बार फिर पूरे देश में अपना परचम लहराया है। वर्तमान में मध्य प्रदेश बाघ (Tiger), चीता (Cheetah), तेंदुआ (Leopard), भेड़िया (Wolf), घड़ियाल (Gharial) और गिद्धों (Vulture) की सर्वाधिक संख्या और उनके उत्कृष्ट संरक्षण के मामले में देश में पहले स्थान पर है।
यह महत्वपूर्ण जानकारी वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री निवास के ‘समत्व भवन’ में आयोजित वन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दी। इस बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने भी वर्चुअली हिस्सा लिया।
चीतों का तीसरा घर बन रहा ‘वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व’
बैठक में प्रमुख सचिव संदीप यादव ने बताया कि मध्य प्रदेश में इस समय कुल 52 चीते मौजूद हैं, जिनमें से 32 चीतों का जन्म कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) में ही हुआ है। इसके साथ ही, सागर जिले में स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को प्रदेश में चीतों के तीसरे घर के रूप में तेजी से विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा, मंदसौर जिले के गांधीसागर अभ्यारण्य में भी जुलाई 2026 में नर-मादा चीतों को छोड़ने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
वन पर्यटन का विस्तार और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वनों के विस्तार के साथ-साथ वन पर्यटन (Forest Tourism) का तेजी से विस्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की पहचान उसकी प्राकृतिक धरोहर और समृद्ध जैव विविधता से है, जिसका संरक्षण हमारी भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए जंगलों में सुविधाएं बढ़ाई जाएं, सफारी गाड़ियों की संख्या बढ़ाई जाए और पर्यटकों को स्थानीय ‘होम-स्टे’ जैसी ग्रामीण संस्कृति का अनुभव प्रदान करने वाली योजनाओं से जोड़ा जाए।
मुख्यमंत्री ने जंगल की सीमा में रहने वाले जनजातीय बंधुओं के आस्था केंद्रों यानी ‘देवस्थानों’ को उनके रीति-रिवाजों के अनुसार विकसित करने पर बल दिया। बैठक में बताया गया कि इस वर्ष प्रदेश में 300 नए देवस्थान विकसित किए जाएंगे, जबकि अब तक 1421 देवस्थान विकसित किए जा चुके हैं।
आंध्र प्रदेश को मिलेंगे बाघ और गौर, राजस्थान से आएगी ‘सोन चिरैया’
वन्यजीवों के संरक्षण और राज्यों के आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए समीक्षा बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:
- आंध्र प्रदेश के साथ आदान-प्रदान: आंध्र प्रदेश सरकार के अनुरोध पर मध्य प्रदेश उन्हें बाघ और गौर (Indian Bison) प्रदान करेगा। इसके बदले में आंध्र प्रदेश से दुर्लभ वाइल्ड डॉग्स (Wild Dogs) या अन्य वन्य प्राणियों को मध्य प्रदेश लाने के प्रयास किए जाएंगे।
- राजस्थान से सोन चिरैया: राजस्थान सरकार द्वारा सोन चिरैया (Great Indian Bustard) देने पर सहमति व्यक्त की गई है। इन्हें राजस्थान से लाकर मध्य प्रदेश के घाटीगांव और गांधीसागर के अभ्यारण्यों में छोड़ा जाएगा।
सुरक्षा के लिए ‘कमांड रूम’ और संगठित वन अपराधों पर टास्क फोर्स
मुख्यमंत्री ने वन्यजीवों की सुरक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कई नए प्रस्तावों को मंजूरी दी:
- वनों में होने वाले संगठित अपराधों पर लगाम लगाने के लिए राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स की तर्ज पर एक **’राज्य स्तरीय टास्क फोर्स’** का गठन किया जाएगा।
- वन एवं वन्यजीवों की 24 घंटे निगरानी के लिए वन मुख्यालय स्तर पर अत्याधुनिक **’कमांड एवं कंट्रोल रूम’** स्थापित किया जाएगा।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की घटनाओं को **’राज्य आपदा’** घोषित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि प्रशासन, पुलिस और वन विभाग मिलकर त्वरित राहत व प्रबंधन कर सकें।
5 नेशनल पार्कों के पास बनेंगे रेस्क्यू सेंटर, हाथियों के लिए बढ़ेंगे पद
वन विभाग द्वारा वन्यजीवों के त्वरित उपचार और सहायता के लिए कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और पन्ना नेशनल पार्क के समीप अत्याधुनिक **वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू सेंटर** (Wildlife Rescue Centers) बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही, जंगली हाथियों के सुचारू प्रबंधन को सीखने के लिए वन विभाग की टीम ने पश्चिम बंगाल का दौरा किया है। केंद्र सरकार ने 6 हाथियों में रेडियो कॉलर लगाने की अनुमति दे दी है, और हाथियों की देखरेख के लिए सहायक महावतों के पद बढ़ाए जा रहे हैं।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि अनूपपुर और डिंडौरी के जंगलों में साल वृक्षों में लगने वाली ‘साल बोरर’ बीमारी देखने को मिली है, जो करीब 30 साल बाद आई है (इससे पहले 1997 में आई थी)। इसके विमोचन के लिए अतिरिक्त बजट से बीमारीग्रस्त वृक्षों का वैज्ञानिक तरीके से उपचार व विदोहन किया जाएगा। साथ ही, वर्ष 2026 में 17.76 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण किया गया है, जिसके लिए संग्राहकों को 710.71 करोड़ रुपये की बोनस राशि बांटी जाएगी। प्रदेश के 700 वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में बदलने की प्रक्रिया भी प्रगति पर है।