मैनपुरी के ऐतिहासिक समान पक्षी विहार के सुंदरीकरण का काम तेज: पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बनेंगे नए व्यू पॉइंट और नेचर ट्रेल
मैनपुरी। प्रकृति प्रेमियों और पक्षी प्रेमियों के लिए एक बेहद सुखद और उत्साहजनक खबर है। मैनपुरी जिले के ऐतिहासिक और जैव विविधता से समृद्ध ‘समान पक्षी विहार’ (Saman Bird Sanctuary) के कायाकल्प और सुंदरीकरण का कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। वन विभाग और उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के साझा सहयोग से इस रामसर साइट (Ramsar Site) को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। परियोजना के तहत पक्षी विहार परिसर में पर्यटकों की सुविधा के लिए नए व्यू पॉइंट (निरीक्षण केंद्र), आधुनिक वॉच टावर और प्रकृति के बीच चलने के लिए ‘नेचर ट्रेल’ (प्रकृति पथ) का निर्माण किया जा रहा है, जिससे यहां आने वाले सैलानियों को एक नया और रोमांचकारी अनुभव मिलेगा।
हजारों विदेशी प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा बसेरा
मैनपुरी का समान पक्षी विहार लगभग 5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह प्राकृतिक दलदली और जलमग्न क्षेत्र सर्दियों के मौसम में साइबेरिया, मंगोलिया, मध्य एशिया और यूरोप से आने वाले हजारों मील दूर के प्रवासी पक्षियों के लिए एक सुरक्षित और पसंदीदा बसेरा बनता है। यहां पिंटेल, कॉमन टील, यूरेशियन विजन, और विभिन्न प्रजातियों के सारस क्रेन जैसे दुर्लभ पक्षी भारी संख्या में देखे जाते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, समान पक्षी विहार न केवल पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पक्षियों के संरक्षण और प्रजनन के लिए भी एक आदर्श पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करता है।
पर्यटन बुनियादी ढांचे का आधुनिक विकास
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस सुंदरीकरण परियोजना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ईको-टूरिज्म (पारिस्थितिकी पर्यटन) को बढ़ावा देना है। पक्षी विहार के मुख्य जलाशय के चारों ओर साइकिल ट्रैक और पैदल चलने के लिए नेचर ट्रेल विकसित की जा रही है, ताकि पर्यटक बिना किसी शोर-शराबे के प्राकृतिक शांति का आनंद ले सकें। इसके अलावा, पर्यटकों को पक्षियों को करीब से देखने और उनकी फोटोग्राफी करने के लिए उच्च क्षमता वाले दूरबीनों से लैस तीन नए आधुनिक वॉच टावर स्थापित किए जा रहे हैं। बच्चों के मनोरंजन और ज्ञानवर्धन के लिए एक आधुनिक इंटरप्रिटेशन सेंटर (व्याख्या केंद्र) भी बनाया जा रहा है, जहां डिजिटल माध्यम से पक्षियों के जीवन और प्रवास चक्र की जानकारी दी जाएगी।
स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
समान पक्षी विहार का विकास केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। वन विभाग स्थानीय युवाओं को ‘गाइड’ (मार्गदर्शक) के रूप में प्रशिक्षित कर रहा है, जो पर्यटकों को पक्षियों की पहचान और उनके महत्व के बारे में जानकारी देंगे। इसके अतिरिक्त, पर्यटकों के आगमन से स्थानीय हस्तशिल्प, छोटे दुकानदारों, ढाबा संचालकों और परिवहन सेवाओं से जुड़े लोगों की आय में भी महत्वपूर्ण वृद्धि होगी। सरकार की योजना है कि पक्षी विहार के समीप एक ग्रामीण हाट भी विकसित की जाए, जहां मैनपुरी के प्रसिद्ध हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री की जा सके।
संरक्षण के कड़े उपाय और सामुदायिक भागीदारी
पक्षी विहार में पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। वन अधिकारियों के अनुसार, पूरे परिसर को ‘प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र’ घोषित किया गया है। पर्यटकों द्वारा लाए जाने वाले प्लास्टिक की बोतलों और कचरे के निपटान के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। जलाशय के पानी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए आस-पास के गांवों में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है और रासायनिक खादों के प्रयोग को कम करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। वन्यजीव विभाग और ग्राम पंचायतों के बीच एक संयुक्त समन्वय समिति बनाई गई है ताकि स्थानीय ग्रामीण भी इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें।