ताजमहल के संरक्षण और यमुना नदी की अविरलता के लिए केंद्र व राज्य सरकार की संयुक्त महायोजना
आगरा। दुनिया के सात अजूबों में शामिल और भारत की सांस्कृतिक विरासत का गौरव, ताजमहल हर साल करोड़ों पर्यटकों को आकर्षित करता है। लेकिन इस बेजोड़ ऐतिहासिक स्मारक की सफेदी और इसके पार्श्व में बहने वाली यमुना नदी का अस्तित्व पिछले कुछ दशकों से प्रदूषण के भीषण संकट का सामना कर रहा है। संगमरमर के इस अद्भुत स्मारक को प्रदूषण की मार से बचाने और यमुना नदी की खोई हुई गरिमा को वापस लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर एक महत्वाकांक्षी एकीकृत कार्ययोजना की घोषणा की है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के दिशा-निर्देशों के तहत इस योजना पर तेजी से अमल किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।
यमुना प्रदूषण का ताजमहल के संगमरमर पर सीधा प्रभाव
यमुना नदी का ताजमहल के साथ एक अटूट संबंध है, लेकिन दिल्ली और हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाले रासायनिक कचरे और आगरा शहर के अनुपचारित सीवेज के कारण आज यह नदी एक गहरे संकट में है। पानी की कमी और बढ़ते प्रदूषण के कारण यमुना का पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है, जिससे नदी में ऑक्सीजन का स्तर समाप्त हो गया है। इस दूषित वातावरण में ‘चिरोनोमस कैलीग्राफस’ नामक एक विशेष कीड़ा तेजी से पनपता है। यह कीड़ा रात के समय ताजमहल के संगमरमर के पत्थरों पर बैठता है और वहां हरे-काले दाग छोड़ देता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, संगमरमर को इस कीड़े के दागों से बचाने के लिए यमुना में पानी की मात्रा बढ़ाना और उसकी स्वच्छता सुनिश्चित करना ही एकमात्र समाधान है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) का आधुनिकीकरण और नाला डायवर्जन
यमुना नदी को साफ करने के उद्देश्य से आगरा नगर निगम और जल निगम ने नदी में गिरने वाले सभी नालों को टैप (Tap) करके उन्हें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) से जोड़ने की योजना पर काम तेज कर दिया है। शहर में लगभग 1,200 करोड़ रुपये के बजट से नए विकेंद्रीकृत अपशिष्ट शोधन संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि आने वाले समय में आगरा का एक भी बूंद गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के यमुना नदी में न जाए। इसके अलावा, ट्रीटेड पानी का पुनर्चक्रण (Recycling) कर उसका उपयोग पार्कों और औद्योगिक इकाइयों में किया जाएगा, जिससे नदी पर पानी का दबाव कम होगा।
ताज ट्रैपेजियम जोन (TTZ) में पर्यावरणीय कड़ाई
ताजमहल के आसपास वायु प्रदूषण को कम करने के लिए 10,400 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले ताज ट्रैपेजियम जोन (TTZ) में नए और कड़े नियम लागू किए गए हैं। स्मारक के 500 मीटर के बफर जोन में डीजल और पेट्रोल वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। पर्यटकों के आवागमन के लिए केवल ई-रिक्शा, इलेक्ट्रिक गोल्फ कार्ट और पर्यावरण-अनुकूल सीएनजी बसों को अनुमति दी गई है। स्थानीय उद्योगों को कोयले और भट्टी के पारंपरिक ईंधन से हटाकर पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) पर स्थानांतरित किया जा रहा है। इन कदमों से आगरा की हवा में सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन कणों की मात्रा में उल्लेखनीय गिरावट देखी जा रही है।
संगमरमर की चमक बनाए रखने के लिए मड-पैक थेरेपी
ताजमहल की दीवारों पर जमे पीलेपन और वायुमंडलीय गंदगी को दूर करने के लिए एएसआई के रसायन विभाग द्वारा नियमित अंतराल पर ‘मड-पैक थेरेपी’ (Mud-Pack Therapy) का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में मुल्तानी मिट्टी का एक विशेष लेप संगमरमर की सतह पर लगाया जाता है। यह लेप पत्थरों के रोम-छिद्रों में फंसी गंदगी, सल्फर और ग्रीस को सोख लेता है। लेप के सूखने के बाद इसे डिस्टिल्ड वाटर (आसुत जल) से बेहद सावधानीपूर्वक धोया जाता है। यह एक वैज्ञानिक और पूर्णतः सुरक्षित प्रक्रिया है, जिससे संगमरमर के पत्थर को बिना किसी नुकसान के उसकी प्राकृतिक चमक वापस मिल जाती है।
नदी पुनर्जीवन के लिए यमुना पर डाउनस्ट्रीम बैराज की मांग
ताजमहल के संरक्षण और यमुना में पानी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए पर्यावरणविदों ने आगरा में यमुना नदी पर एक डाउनस्ट्रीम बैराज (Downstream Barrage) के निर्माण की पुरजोर मांग की है। इस बैराज के निर्माण से मानसून के दौरान पानी को संग्रहित किया जा सकेगा और साल भर ताजमहल के पीछे पानी की एक न्यूनतम मात्रा बनी रहेगी। पानी के निरंतर बहाव से न केवल कीड़ों की समस्या समाप्त होगी, बल्कि पर्यटकों को भी ताजमहल के पीछे यमुना नदी का एक खूबसूरत दृश्य देखने को मिलेगा, जो पर्यटन विकास को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
जनभागीदारी और हरित पर्यटन (Green Tourism) का संकल्प
किसी भी ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण केवल प्रशासनिक नीतियों से संभव नहीं है, इसके लिए आम जनमानस की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। जिला प्रशासन ने स्थानीय गाइडों, होटल स्वामियों और स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान शुरू किया है। ताजमहल परिसर और उसके आसपास सिंगल-यूज प्लास्टिक की वस्तुओं के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। पर्यटकों से भी अनुरोध किया जा रहा है कि वे धरोहर क्षेत्र को साफ रखने में सहयोग दें। सामूहिक प्रयासों से ही हम ताजमहल की ऐतिहासिक चमक और यमुना की पवित्रता को सदियों तक सुरक्षित रख सकते हैं।