विश्व योग एवं संगीत दिवस पर कला और संस्कृति की त्रिवेणी से महकेगा मध्य प्रदेश, 14 स्थानों पर होंगे भव्य सांस्कृतिक आयोजन
भोपाल। 21 जून को ‘विश्व योग एवं संगीत दिवस’ के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश में संस्कृति विभाग द्वारा कला, संगीत और संस्कृति का एक अनूठा व भव्य उत्सव मनाया जा रहा है। इस विशेष दिन पर राज्य के 14 अलग-अलग ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहरों में भव्य आयोजन होंगे, जहाँ सुर, ताल, नृत्य और कला की भव्य त्रिवेणी बहेगी।
संस्कृति विभाग के संचालक एनपी नामदेव ने गुरुवार को इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इन 14 स्थानों पर आयोजित होने वाली सांस्कृतिक श्रृंखलाओं में मध्य प्रदेश के साथ-साथ देश भर के सुप्रतिष्ठित और ख्यातिलब्ध संगीतकार, नर्तक और चित्रकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जो कला अनुरागियों और आम नागरिकों के लिए एक अविस्मरणीय और अनूठा अनुभव होगा।
भारतीय शास्त्रीय संगीत: आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाली साधना
संस्कृति संचालक नामदेव ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी सदियों पुरानी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का एक अटूट हिस्सा है। यह सिर्फ सुरों और रागों का मेल नहीं है, बल्कि यह आत्मा को परमात्मा से मिलाने वाली साधना और असीम मानसिक शांति प्राप्त करने का एक परम माध्यम है।
उन्होंने बताया कि इस गौरवशाली परंपरा का उत्सव मनाना हम सभी के लिए अत्यंत गर्व की बात है। इसका मुख्य उद्देश्य हमारी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, समृद्ध संस्कृति और कलात्मक धरोहर के प्रति जागरूक व गौरवान्वित करना है। इसी कड़ी में, 21 जून को भोपाल स्थित जनजातीय संग्रहालय (Tribal Museum) में एक विशेष संगीत और नृत्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है।
भोपाल के जनजातीय संग्रहालय में सजेगी संगीत और नृत्य की महफिल
भोपाल के जनजातीय संग्रहालय में आयोजित होने वाले मुख्य समारोह की शुरुआत सायंकाल 7:00 बजे होगी। शाम की सुरमयी शुरुआत प्रदक्षिणा भट्ट (भोपाल) के शास्त्रीय गायन से होगी। इसके पश्चात पुणे की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना स्मिता महाजन अपने भावपूर्ण भरतनाट्यम नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति देंगी। संस्कृति विभाग ने इस गरिमामयी कार्यक्रम में आम जनता और कला अनुरागियों के लिए प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क रखा है।
प्रदेश के शासकीय संगीत महाविद्यालयों में सुर और ताल का संगम
भोपाल के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित शासकीय संगीत महाविद्यालयों में भी संगीत की महफिलें सजेंगी, जिसमें उत्कृष्ट प्रस्तुतियां दी जाएंगी:
- नरसिंहगढ़: यहाँ आकाश गुंटीवार का शास्त्रीय गायन और मोहिका सक्सेना का भरतनाट्यम नृत्य होगा।
- उज्जैन: बाबा महाकाल की नगरी में यश देवले के शास्त्रीय गायन के बाद सुप्रसिद्ध नृत्यांगना सुचित्रा हरमलकर का कथक नृत्य दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगा।
- ग्वालियर: तानसेन की नगरी में श्वेता गुंजन जोशी का गायन और सन्नाली शर्मा का कथक नृत्य होगा।
- खंडवा: किशोर कुमार की जन्मभूमि पर सुप्रियो मैत्रो व आकाश तिवारी का गायन और प्रियंवदा सिंह का कथक नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा।
- मंदसौर: यहाँ डॉ. नीलिमा छापेकर के गायन के साथ मुन्ने खाँ और आबिद हुसैन का जुगलबंदी भरा सारंगी वादन होगा।
- मैहर: संगीत की इस नगरी में विजय सप्रे के गायन और शालिनी खरे के कथक नृत्य की प्रस्तुति होगी।
- इंदौर: अहिल्या नगरी में दामोदर राव के गायन और भार्गवी शर्मा एवं समूह के कथक नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियां होंगी।
ललित कला महाविद्यालयों में जीवंत कला प्रदर्शन व व्याख्यान
संस्कृति संचालक नामदेव ने बताया कि संगीत व नृत्य के साथ-साथ दृश्य कलाओं के संवर्धन के लिए प्रदेश के शासकीय ललित कला महाविद्यालयों में विशेष व्याख्यान और लाइव प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) आयोजित किए जा रहे हैं:
- ग्वालियर व धार: ग्वालियर में बसंत भार्गव और धार में निधि चोपड़ा चित्रकला की बारीकियों को साझा करेंगे।
- इंदौर: गुजरात के सुप्रसिद्ध चित्रकार जयंती राबड़िया चित्रकला पर अपने दीर्घकालीन अनुभव और शैलियों को साझा करेंगे।
- जबलपुर: मूर्तिकला और शिल्पकला को बढ़ावा देने के लिए वाराणसी के मदनलाल शिल्पकला विषय पर व्याख्यान और जीवंत प्रदर्शन करेंगे।
- खंडवा: खंडवा में प्रसिद्ध मूर्तिकार गिरिजा वायंगणकर मूर्तिकला विषय पर व्याख्यान और जीवंत प्रदर्शन प्रस्तुत करेंगी।
संस्कृति विभाग का यह प्रयास निश्चित रूप से मध्य प्रदेश में कलात्मक चेतना को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगा।