इटावा में यातायात व्यवस्था होगी सुदृढ़: 150 करोड़ की लागत से बनेगा नया बाईपास और रिंग रोड, लोक निर्माण विभाग ने तैयार किया खाका
इटावा। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में स्थित और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण जनपद इटावा की शहरी अवसंरचना को एक नई पहचान मिलने जा रही है। शहर में लगातार बढ़ती आबादी और वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण यातायात प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन चुका था। इस समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए प्रदेश सरकार के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग (PWD) ने एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। विभाग द्वारा लगभग 150 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 18 किलोमीटर लंबी रिंग रोड और एक नए बाईपास मार्ग के निर्माण का खाका तैयार किया गया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहर के भीतरी इलाकों को बड़े मालवाहक वाहनों और भारी यातायात के दबाव से मुक्त कराना है, जिससे स्थानीय नागरिकों को रोजाना होने वाले मानसिक तनाव और समय की बर्बादी से राहत देख सकें।
भीषण जाम और दुर्घटनाओं से मिलेगी मुक्ति
इटावा शहर भौगोलिक रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के त्रिकोणीय गलियारे के समीप स्थित है। कानपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्वालियर-भिंड मार्ग से आने वाले सैकड़ों भारी वाहन, ट्रक और ट्रॉली प्रतिदिन शहर के मध्य से होकर गुजरते हैं। इसके कारण शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों जैसे शास्त्री चौराहा, राजागंज, पक्का तालाब, और कचहरी मार्ग पर हमेशा वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। स्कूली बच्चों, एम्बुलेंस और कामकाजी लोगों को घंटों इस जाम में फंसे रहना पड़ता है। इसके अलावा, व्यस्त समय में भारी वाहनों के प्रवेश के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं, जिनमें कई बार स्थानीय नागरिकों को अपनी जान भी गंवानी पड़ती है। इस नए फोर-लेन रिंग रोड के निर्माण से ये सभी भारी वाहन शहर के बाहर से ही अपने गंतव्य की ओर निकल जाएंगे, जिससे शहर के आंतरिक मार्ग सुरक्षित और जाम-मुक्त हो सकेंगे।
परियोजना की रूपरेखा, बजट और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया
लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि परियोजना की कुल लंबाई 18.5 किलोमीटर होगी। इस पूरे मार्ग को फोर-लेन चौड़ा बनाया जाएगा, जिसमें दोनों ओर ढाई-ढाई मीटर के पक्के शोल्डर भी शामिल होंगे ताकि आपातकालीन स्थिति में वाहन खड़े किए जा सकें। 150 करोड़ रुपये के कुल प्रस्तावित बजट में से लगभग 90 करोड़ रुपये सड़क निर्माण, पुलों के निर्माण और प्रकाश व्यवस्था पर खर्च होंगे, जबकि शेष 60 करोड़ रुपये की धनराशि भूमि अधिग्रहण और किसानों के मुआवजे के लिए आरक्षित की गई है। इस रिंग रोड के दायरे में इटावा सदर और जसवंतनगर तहसील के अंतर्गत आने वाले लगभग 14 गांव शामिल हैं। जिलाधिकारी ने राजस्व विभाग और भूमि अध्याप्ति अधिकारी (LAO) के नेतृत्व में एक संयुक्त समिति का गठन किया है जो किसानों के साथ बैठक कर आपसी सहमति के आधार पर पारदर्शी तरीके से भूमि का अधिग्रहण करेगी और त्वरित गति से मुआवजा वितरण सुनिश्चित करेगी।
प्रस्तावित मार्ग की अलाइनमेंट और प्रमुख संरचनाएं
तकनीकी टीम द्वारा तैयार किए गए अलाइनमेंट के अनुसार, यह रिंग रोड आगरा रोड पर जसवंतनगर के पास से शुरू होकर मैनपुरी रोड, करहल रोड और फर्रुखाबाद रोड को आपस में जोड़ते हुए अंत में कानपुर रोड (NH-19) पर जाकर मिलेगी। इस विस्तृत मार्ग पर रेलवे लाइनों को पार करने के लिए दो बड़े रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, दो प्रमुख नदियों के ऊपर मध्यम आकार के पुलों का निर्माण भी प्रस्तावित है। प्रमुख चौराहों पर आधुनिक ट्रैफिक सिग्नलिंग सिस्टम और चौड़े रोटरी जंक्शन बनाए जाएंगे ताकि वाहनों के मुड़ने में कोई कठिनाई न हो। पूरी सड़क पर उच्च गुणवत्ता वाली कोलतार कंक्रीट (Denser Bituminous Concrete) का उपयोग किया जाएगा, जिससे यह भारी ट्रकों का भार लंबे समय तक सहन कर सके। सुरक्षा के दृष्टिकोण से सड़क के दोनों ओर रिफ्लेक्टिव साइनबोर्ड और कैट्स-आई लगाए जाएंगे।
पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन कॉरिडोर का विकास
इस परियोजना की एक अनूठी विशेषता यह है कि इसे पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल यानी ‘ग्रीन कॉरिडोर’ के रूप में विकसित किया जाएगा। सड़क के दोनों ओर तथा बीच के डिवाइडर पर स्थानीय जलवायु के अनुकूल छायादार और प्रदूषण-शोषक वृक्ष जैसे नीम, पीपल, गुलमोहर और अमलतास के पौधे लगाए जाएंगे। जल भराव की समस्या को रोकने के लिए सड़क के दोनों किनारों पर आरसीसी (RCC) की पक्की नालियों का निर्माण किया जाएगा, जो प्राकृतिक जल स्रोतों से जुड़ी होंगी। इसके अलावा, रात के समय बेहतर दृश्यता सुनिश्चित करने के लिए पूरी रिंग रोड पर ऊर्जा-बचत वाली स्मार्ट एलईडी लाइटें लगाई जाएंगी, जो सौर ऊर्जा से संचालित होंगी।
व्यापारिक संगठन और स्थानीय जनता का समर्थन
इस वृहद परियोजना को लेकर इटावा के व्यापार मंडल और नागरिक कल्याण समितियों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। व्यापार मंडल के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में जाम के कारण बाहरी क्षेत्रों से आने वाले ग्राहक शहर के बाजारों में आने से कतराते हैं, जिससे व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। रिंग रोड बनने से बाजारों में पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहनों के लिए सुरक्षित वातावरण बनेगा, जिससे व्यापार को नई गति मिलेगी। प्रशासन के अनुसार, शासन से वित्तीय स्वीकृति मिलते ही ई-टेंडरिंग के माध्यम से निर्माण एजेंसी का चयन किया जाएगा और आगामी छह महीनों के भीतर धरातल पर काम शुरू कर दिया जाएगा। इस परियोजना को पूरा करने के लिए 24 महीने का समय निर्धारित किया गया है, और विभाग समयबद्ध तरीके से इसकी निगरानी करेगा।