इटावा के किसानों के लिए बड़ी सौगात: पचनद नदी परियोजना से जुड़ेंगे 50 गांव, पेयजल और सिंचाई की समस्या का होगा स्थायी समाधान
इटावा। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड सीमा से सटे इटावा जनपद के ग्रामीण इलाकों में जल संकट एक पुरानी और गंभीर समस्या रही है। विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में कृषि भूमि की सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता को लेकर ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। किसानों की इसी पुरानी पीड़ा को दूर करने और कृषि उत्पादकता को बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार ने सिंचाई विभाग के माध्यम से एक ऐतिहासिक परियोजना को हरी झंडी दे दी है। प्रसिद्ध पांच नदियों के संगम यानी ‘पचनद’ से पानी लाकर इटावा के लगभग 50 सुदूरवर्ती गांवों को जोड़ने के लिए एक विशाल जल जीवन और सिंचाई नहर परियोजना का खाका तैयार किया गया है। इस परियोजना के माध्यम से न केवल हजारों हेक्टेयर बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया जा सकेगा, बल्कि क्षेत्र के गिरते भूजल स्तर को सुधारने में भी बड़ी मदद मिलेगी।
पचनद का भौगोलिक महत्व और वर्तमान जल संकट
पचनद क्षेत्र देश का एक अत्यंत विशिष्ट भौगोलिक स्थल है, जहाँ पांच नदियां—यमुना, चंबल, सिंध, क्वारी और पहुज आपस में मिलती हैं। इस विशाल जलराशि के बावजूद, इटावा के ऊंचे पठारी और बीहड़ क्षेत्रों में बसे गांवों को इस पानी का लाभ नहीं मिल पा रहा था क्योंकि भौगोलिक बनावट के कारण पानी खेतों तक नहीं पहुंच पाता था। गर्मियों में भूजल स्तर 150 से 200 फीट नीचे चला जाता है, जिससे नलकूप सूख जाते हैं और फसलों की बुआई प्रभावित होती है। इस परियोजना के तहत पचनद संगम के पास एक अत्याधुनिक लिफ्ट कैनाल सिस्टम (Lift Canal System) स्थापित किया जाएगा, जो पानी को ऊंचाई पर स्थित वितरण नहरों तक पहुंचाएगा।
पचास हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगा जीवनदान
सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता के अनुसार, इस लिफ्ट परियोजना के माध्यम से एक मुख्य नहर और तीन उप-नहरों (Distributaries) का जाल बिछाया जाएगा। इससे इटावा सदर, भरथना और चक्रनगर विकास खंडों के अंतर्गत आने वाले 50 से अधिक गांवों की लगभग 15,000 हेक्टेयर कृषि भूमि सीधे तौर पर सिंचित हो सकेगी। वर्तमान में सिंचाई सुविधाओं के अभाव में किसान वर्ष में केवल एक ही फसल (मुख्य रूप से बाजरा या सरसों) ले पाते थे, लेकिन इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद वे गेहूं, धान और विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियों की खेती भी आसानी से कर सकेंगे। इससे किसानों की वार्षिक आय में दो से तीन गुना तक की वृद्धि होने का अनुमान है।
पेयजल के लिए बनेगा विशाल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट
सिंचाई के साथ-साथ यह योजना इन 50 गांवों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति भी सुनिश्चित करेगी। इसके लिए पचनद के निकट ही एक 25 एमएलडी (MLD) क्षमता का विशाल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और ओवरहेड वॉटर टैंक (पानी की टंकियां) बनाए जाएंगे। इस प्लांट में पानी को पूरी तरह से फिल्टर और शुद्ध करने के बाद जल जीवन मिशन के तहत बिछाई जा रही पाइपलाइनों के माध्यम से सीधे ग्रामीणों के घरों तक पहुंचाया जाएगा। इससे क्षेत्र में दूषित पानी से होने वाली बीमारियों जैसे फ्लोरोसिस और पेट के संक्रमण से लोगों को मुक्ति मिलेगी। ग्रामीण महिलाओं को पीने के पानी के लिए मीलों पैदल चलने की परेशानी से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।
प्रशासनिक तैयारियां और बजट आवंटन
इस महात्वाकांक्षी परियोजना के लिए प्रदेश सरकार ने प्रथम चरण के लिए 85 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर दिया है, जबकि पूरी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 180 करोड़ रुपये है। जिलाधिकारी ने बताया कि सिंचाई विभाग, भूमि संरक्षण विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने नहरों के निर्माण के लिए सर्वेक्षण का कार्य पूरा कर लिया है। वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है, क्योंकि नहर का कुछ हिस्सा बीहड़ और आंशिक रूप से संरक्षित वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। किसानों को आश्वस्त किया गया है कि नहर के रास्ते में आने वाली निजी भूमि का नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
क्षेत्र के किसानों में हर्ष की लहर
पचनद लिफ्ट परियोजना की मंजूरी की खबर सुनते ही क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में जश्न का माहौल है। किसान यूनियनों and स्थानीय ग्राम प्रधानों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह परियोजना इटावा के बीहड़ क्षेत्र के लिए एक वरदान साबित होगी। इससे न केवल कृषि का विकास होगा बल्कि पशुपालन और डेयरी उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा क्योंकि पशुओं के लिए चारे और पानी की कमी दूर हो जाएगी। विभाग ने कार्य शुरू करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है और अगले 18 महीनों में इस वृहद परियोजना को पूरा करने की समय सीमा तय की गई है। नियमित अंतराल पर विकास कार्यों की समीक्षा के लिए जिला स्तर पर एक निगरानी समिति का गठन भी किया गया है।