उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) का बड़ा फैसला: प्रमुख एक्सप्रेसवे के किनारे बनेंगे नए औद्योगिक गलियारे
उत्तर प्रदेश में औद्योगिक क्रांति की नई रूपरेखा
उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मुख्यमंत्री के संकल्प को पूरा करने के लिए यूपी सरकार ने एक्सप्रेसवे के जाल को औद्योगिक प्रगति से जोड़ने का एक महा-प्लान तैयार किया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने राज्य के प्रमुख एक्सप्रेसवे—पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे बड़े औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridors) विकसित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत उद्योगों की स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। इन गलियारों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
निवेश और बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण
एक्सप्रेसवे के किनारे बनने वाले इन औद्योगिक क्षेत्रों में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार विशेष रियायतें और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस की सुविधा प्रदान कर रही है। इन क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति, आधुनिक सड़कों का नेटवर्क, जल शोधन संयंत्र और वेयरहाउसिंग की विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। एक्सप्रेसवे के माध्यम से इन उद्योगों को सीधे बंदरगाहों और देश के अन्य बड़े बाजारों से जोड़ा जाएगा, जिससे परिवहन लागत में भारी कमी आएगी। UPEIDA के अनुसार, कई बड़े राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय उद्योगपतियों ने एक्सप्रेसवे के किनारे कारखाने स्थापित करने में गहरी रुचि दिखाई है।
लाखों युवाओं को मिलेगा स्थानीय रोजगार
इस मेगा औद्योगिक गलियारा परियोजना का सबसे बड़ा लाभ उत्तर प्रदेश के युवाओं को मिलेगा। उद्योगों की स्थापना से राज्य में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे युवाओं का पलायन रुकेगा। औद्योगिक क्षेत्रों के आस-पास नई आवासीय कॉलोनियों, स्कूलों, अस्पतालों और वाणिज्यिक केंद्रों का विकास भी होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिलेगी। उत्तर प्रदेश का एक्सप्रेसवे नेटवर्क अब केवल सफर आसान करने का माध्यम नहीं, बल्कि राज्य के आर्थिक विकास की जीवन रेखा बनने जा रहा है।