मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा क्षेत्र में नई क्रांति: रीवा और सागर में स्थापित हो रहे हैं नए मेगा सोलर पावर प्रोजेक्ट्स
मध्य प्रदेश बना देश का सोलर हब
अक्षय और स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन में मध्य प्रदेश ने पूरे देश में अपना दबदबा कायम कर लिया है। रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम ने सागर, दमोह और शाजापुर जिलों में नए सौर ऊर्जा पार्कों की स्थापना का काम तेज कर दिया है। सरकार की नई सौर ऊर्जा नीति के तहत बंजर और अनुपयोगी जमीनों का उपयोग करके सौर पैनल लगाए जा रहे हैं। इन नए प्रोजेक्ट्स के पूरी तरह चालू होने से मध्य प्रदेश न केवल अपनी घरेलू बिजली की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि दिल्ली मेट्रो और पड़ोसी राज्यों को भी स्वच्छ बिजली की आपूर्ति बढ़ाएगा।
पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मध्य प्रदेश की सौर ऊर्जा परियोजनाएं अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, नए सौर ऊर्जा संयंत्रों के शुरू होने से हर साल लाखों टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को रोका जा सकेगा, जो कि लाखों पेड़ लगाने के बराबर है। सरकार सौर ऊर्जा के साथ-साथ हाइब्रिड पवन-सौर परियोजनाओं और सौर ऊर्जा भंडारण (बैटरी स्टोरेज) प्रणालियों के विकास पर भी काम कर रही है ताकि रात के समय भी निरंतर बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को सीधा लाभ
सौर ऊर्जा परियोजनाओं के आने से ग्रामीण क्षेत्रों का विकास तेजी से हो रहा है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत किसानों को अपने खेतों में छोटे सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए भारी सब्सिडी दी जा रही है। इससे किसान अपनी जरूरत की बिजली स्वयं बना रहे हैं और अतिरिक्त बिजली को सरकार को बेचकर अतिरिक्त आय कमा रहे हैं। बंजर जमीन वाले किसानों को अपनी जमीन सौर परियोजनाओं के लिए लीज पर देने से नियमित किराया मिल रहा है। मध्य प्रदेश का यह हरित ऊर्जा मॉडल पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन चुका है।