आगरा कलेक्ट्रेट में आशा, आंगनबाड़ी और संविदा कर्मचारियों का विशाल प्रदर्शन, वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग
आगरा। आगरा जिले की सैकड़ों आशा बहुओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और विभिन्न सरकारी विभागों के संविदा कर्मचारियों (Contractual Workers) ने शुक्रवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में एक बड़ा और उग्र प्रदर्शन किया। कर्मचारी संघ के बैनर तले कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने मानदेय में वृद्धि, वेतन विसंगतियों को दूर करने और राज्य कर्मचारियों का दर्जा देने की मांग को लेकर नारेबाजी की। कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों का एक ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट के माध्यम से सरकार को भेजा।
अल्प मानदेय में काम करने को मजबूर हैं स्वास्थ्य कार्यकर्ता
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कर्मचारी नेताओं ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और बच्चों के पोषण की जिम्मेदारी संभालने वाली आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दिन-रात काम करती हैं, लेकिन उन्हें जो मानदेय मिलता है वह बहुत ही कम है। महंगाई के इस दौर में मात्र 5 से 6 हजार रुपये के मासिक मानदेय पर गुजारा करना असंभव हो गया है। संविदा कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें समान कार्य के लिए समान वेतन (Equal Pay for Equal Work) के सिद्धांत के तहत नियमित वेतनमान दिया जाए।
विभागीय शोषण और ईएसआई (ESI) सुरक्षा का मुद्दा
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कई विभागों में संविदा कर्मियों का शोषण किया जा रहा है। उन्हें ईएसआई और ईपीएफ (EPF) जैसी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। महिला कर्मचारियों ने प्रसूति अवकाश (Maternity Leave) की सुविधा देने की भी मांग उठाई। धरने पर बैठी महिला कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब तक सरकार उनके मानदेय को सम्मानजनक स्तर तक नहीं बढ़ाती, तब तक उनका यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर वे काम ठप कर हड़ताल पर चली जाएंगी।
प्रशासनिक अधिकारियों ने दिया मध्यस्थता का भरोसा
कलेक्ट्रेट पर बढ़ते प्रदर्शन और सुरक्षा को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कलेक्ट्रेट के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने धरना स्थल पर जाकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उनका मांग पत्र स्वीकार किया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि स्थानीय स्तर की मांगों (जैसे ईएसआई पंजीकरण और समय पर मानदेय भुगतान) का समाधान तुरंत जिला स्तर पर किया जाएगा, जबकि नीतिगत मांगों को अग्रसारित कर शासन स्तर पर चर्चा के लिए भेजा जाएगा।