आगरा के पार्कों से हटेगा विदेशी विलायती बबूल: टीटीजेड (TTZ) प्राधिकरण का बड़ा फैसला, देशी नीम और पीपल के पौधे लगाएंगे
आगरा। ताज संरक्षण क्षेत्र यानी ताज ट्रैपेजियम जोन (TTZ) प्राधिकरण ने आगरा के पर्यावरण को सुरक्षित रखने और जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। टीटीजेड की उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया है कि आगरा के सभी प्रमुख ऐतिहासिक उद्यानों और पार्कों से आक्रामक विदेशी प्रजाति ‘विलायती बबूल’ (Prosopis juliflora) को पूरी तरह से हटा दिया जाएगा। इसके स्थान पर स्थानीय मिट्टी के अनुकूल देशी छायादार और फलदार वृक्ष जैसे नीम, पीपल, बरगद, और अमलतास के पौधों का रोपण किया जाएगा।
भूमिगत जल स्तर को भारी नुकसान पहुंचा रहा है विलायती बबूल
पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, विलायती बबूल एक बेहद आक्रामक वनस्पति है जो आस-पास के अन्य देशी पौधों को पनपने नहीं देती। इसकी जड़ें बहुत गहराई तक जाकर भूमिगत जल (groundwater) को सोख लेती हैं, जिससे आगरा का गिरता भूजल स्तर और भी नीचे चला गया है। इसके अलावा, इस पेड़ पर स्थानीय पक्षी भी अपना घोंसला नहीं बनाते हैं। इन सभी दुष्परिणामों को देखते हुए वन विभाग और उद्यान विभाग ने संयुक्त रूप से इस बबूल उन्मूलन अभियान की रूपरेखा तैयार की है।
पालीवाल पार्क और ताज नेचर वॉक से होगी शुरुआत
इस बड़े अभियान की शुरुआत आगरा के ऐतिहासिक पालीवाल पार्क और ताजमहल के समीप स्थित ‘ताज नेचर वॉक’ से की जाएगी। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पहले चरण में इन पार्कों में मौजूद बबूल के झाड़ों को उखाड़ा जाएगा और उस खाली जगह पर बड़े आकार के देशी पौधों का रोपण किया जाएगा ताकि वे जल्द विकसित हो सकें। इस अभियान में स्थानीय पर्यावरण समितियों और स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) का भी सहयोग लिया जा रहा है।
देशी पौधों से महकेगी ताज नगरी
देशी पौधों के रोपण से न केवल पार्क हरे-भरे होंगे बल्कि यहाँ आने वाले स्थानीय और विदेशी पर्यटकों को शुद्ध हवा और छाया मिलेगी। देशी पेड़ों के फल और फूल स्थानीय पक्षियों और गिलहरियों के लिए प्राकृतिक भोजन का काम करेंगे, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में सुधार होगा। टीटीजेड प्राधिकरण के अध्यक्ष ने कहा कि यह कदम आगरा के ऐतिहासिक स्मारकों को वायु प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से बचाने में भी दीर्घकालिक रूप से मददगार साबित होगा।