इटावा जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: 100 नए वेंटिलेटर बेड और आधुनिक डायलिसिस यूनिट का शुभारंभ
इटावा। इटावा और आस-पास के जनपदों जैसे औरैया, मैनपुरी, जालौन और फर्रुखाबाद के मरीजों को अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आगरा, कानपुर या दिल्ली की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। प्रदेश सरकार के मिशन ‘निरामया’ के तहत इटावा जिला पुरुष चिकित्सालय और डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय संयुक्त चिकित्सालय व मेडिकल कॉलेज में बड़े स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से अस्पताल को 100 नए वेंटिलेटर युक्त आईसीयू (ICU) बेड और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के तहत एक अत्याधुनिक डायलिसिस यूनिट की सौगात दी गई है। इन नई सुविधाओं का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथि और स्थानीय जन प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया गया, जिससे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को एक नया बल मिला है।
गंभीर मरीजों को अब स्थानीय स्तर पर मिलेगा त्वरित इलाज
इटावा जिला अस्पताल में पहले वेंटिलेटर बेड की संख्या सीमित थी, जिसके कारण गंभीर रूप से बीमार मरीजों, दुर्घटना के शिकार लोगों और नवजातों को तत्काल उच्च केंद्रों (रेफरल अस्पतालों) के लिए रेफर करना पड़ता था। कई बार रेफर किए गए मरीजों की रास्ते में ही एम्बुलेंस के भीतर मृत्यु हो जाती थी। इस दर्दनाक स्थिति को समाप्त करने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मेडिकल कॉलेज में 60 और जिला अस्पताल में 40 नए अत्याधुनिक वेंटिलेटर बेड स्थापित किए हैं। इन सभी बेडों को केंद्रीयकृत ऑक्सीजन सिस्टम (Centralized Oxygen System) और मल्टी-पैरा मॉनिटर से जोड़ा गया है, जिससे गंभीर मरीजों के हृदय की गति, रक्तचाप और ऑक्सीजन स्तर पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
किडनी मरीजों के लिए निःशुल्क डायलिसिस सुविधा
इस स्वास्थ्य विस्तार कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभ किडनी की बीमारियों से पीड़ित मरीजों को मिलेगा। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस योजना के अंतर्गत जिला अस्पताल परिसर में 10 बेड की नई आधुनिक डायलिसिस यूनिट चालू की गई है। इस यूनिट में जर्मन तकनीक की डायलिसिस मशीनें लगाई गई हैं, जो बेहद सटीक और सुरक्षित तरीके से काम करती हैं। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गरीबी रेखा के नीचे (BPL) आने वाले और आयुष्मान भारत कार्ड धारकों के लिए यह डायलिसिस सुविधा पूरी तरह से निःशुल्क होगी, जबकि अन्य सामान्य मरीजों से बहुत ही न्यूनतम शुल्क लिया जाएगा। इससे उन गरीब परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी जो निजी अस्पतालों में हर सप्ताह हजारों रुपये डायलिसिस पर खर्च करने के लिए मजबूर थे।
विशेषज्ञ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की नई नियुक्तियां
अस्पताल में केवल उपकरण लगाना ही काफी नहीं होता, बल्कि उनके संचालन के लिए योग्य स्टाफ का होना भी जरूरी है। इसे ध्यान में रखते हुए शासन ने विशेष भर्ती अभियान के तहत मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में 12 नए विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की है, जिनमें कार्डियोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन और एनेस्थेटिस्ट शामिल हैं। इसके साथ ही, आईसीयू और डायलिसिस यूनिट को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए 30 से अधिक विशेष रूप से प्रशिक्षित स्टाफ नर्सों और तकनीशियनों को भी नियुक्त किया गया है। इन सभी नए कर्मियों को लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई (SGPGII) में विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया है ताकि वे जटिल से जटिल चिकित्सा परिस्थितियों को संभाल सकें।
दवाओं की उपलब्धता और पैथोलॉजी जांच का सुदृढीकरण
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) ने बताया कि स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि मरीजों को अस्पताल परिसर के भीतर ही सभी आवश्यक दवाएं मुफ्त मिलें। इसके लिए अस्पताल के दवा स्टोर रूम की क्षमता बढ़ाई गई है और जीवन रक्षक दवाओं का पर्याप्त बफर स्टॉक रखा गया है। साथ ही, पैथोलॉजी लैब को भी डिजिटल एक्स-रे, सीटी स्कैन और आधुनिक रक्त विश्लेषक (Auto Analyzer) मशीनों से लैस किया गया है, जिससे जांच रिपोर्ट अब मात्र कुछ ही घंटों में सीधे डॉक्टरों के कंप्यूटर स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाती है। मरीजों को अब बाहर की निजी प्रयोगशालाओं में महंगी जांच कराने की आवश्यकता नहीं रह गई है।
स्थानीय जनता ने सरकार के प्रयास की सराहना की
इटावा में स्वास्थ्य सेवाओं के इस अभूतपूर्व विस्तार से स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में बेहद खुशी का माहौल है। स्थानीय नागरिक कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने अस्पताल प्रशासन और सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि लंबे समय से इस क्षेत्र में एक सर्वसुविधायुक्त चिकित्सा केंद्र की कमी महसूस की जा रही थी। अब इन सुविधाओं के शुरू होने से न केवल इटावा बल्कि आस-पास के चार अन्य जिलों के गरीब मरीजों को नया जीवन मिलेगा। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित रूप से उपकरणों के रखरखाव और साफ-सफाई की व्यवस्था की निगरानी करें ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।