इटावा पुलिस की बड़ी कामयाबी: अंतराज्यीय वाहन चोर गिरोह के 5 सदस्य गिरफ्तार, चोरी की 12 लग्जरी कारें और अवैध हथियार बरामद
इटावा। त्योहारों और आगामी विधान सभा सत्र के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने में जुटी इटावा पुलिस को एक बड़ी और महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। इटावा पुलिस और विशेष कार्य बल यानी एसओजी (SOG) की संयुक्त टीम ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर घेराबंदी कर एक ऐसे कुख्यात अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से लग्जरी कारें चुराकर उनके फर्जी दस्तावेज तैयार करता था और उन्हें नेपाल तथा देश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में बेच देता था। पुलिस ने गिरोह के पांच सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है और उनकी निशानदेही पर विभिन्न स्थानों से चोरी की गई 12 कीमती लग्जरी कारें, कार चोरी करने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, फर्जी नंबर प्लेट्स और भारी मात्रा में अवैध असलहा बरामद किया है।
मुखबिर की सूचना पर बाईपास के पास की गई घेराबंदी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) इटावा ने पुलिस लाइन सभागार में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान इस सनसनीखेज खुलासे की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ सप्ताह से जिले में और आस-पास के क्षेत्रों से चार पहिया वाहनों की चोरी की घटनाओं में अचानक वृद्धि हुई थी। इसे गंभीरता से लेते हुए उन्होंने एसओजी और स्वाट (SWAT) टीम को सक्रिय किया था। पुलिस की खुफिया इकाई को मुखबिर के जरिए सूचना मिली कि चोरी की दो कारों के साथ गिरोह के कुछ सदस्य इटावा बाईपास के रास्ते ग्वालियर की ओर जाने वाले हैं। इस सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के अंतर्गत हाईवे पर बैरिकेडिंग लगाकर सघन चेकिंग अभियान शुरू किया। कुछ ही समय बाद संदिग्ध गाड़ियां आती दिखाई दीं, जिन्हें पुलिस ने चारों तरफ से घेरकर रोक लिया।
हाई-टेक डिवाइस और जीपीएस जैमर का करते थे उपयोग
पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। यह गिरोह साधारण चोरों की तरह काम नहीं करता था, बल्कि वे पूरी तरह से तकनीकी रूप से सुसज्जित थे। उनके पास से अत्याधुनिक ईसीएम (ECM) प्रोग्रामर, की-कोड स्कैनर, डुप्लिकेट चाबियां बनाने वाली मशीन और जीपीएस जैमर (GPS Jammer) बरामद हुए हैं। आरोपी लग्जरी कारों का लॉक तोड़ने के बाद सबसे पहले कार में लगे जीपीएस को निष्क्रिय करने के लिए जैमर चालू कर देते थे ताकि कार की लाइव लोकेशन ट्रेस न हो सके। इसके बाद वे कार के ओरिजिनल ईसीएम को बदलकर अपने पास मौजूद डिकोडेड ईसीएम को लगा देते थे और गाड़ी को स्टार्ट कर आसानी से फरार हो जाते थे। इस पूरी प्रक्रिया को वे मात्र तीन से पांच मिनट के भीतर अंजाम दे देते थे।
फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेचते थे गाड़ियां
एसपी सिटी ने बताया कि गिरोह का नेटवर्क बेहद विस्तृत है। कार चोरी करने के बाद ये लोग मेरठ, नोएडा और संभल में बैठे अपने सहयोगियों की मदद से दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी गाड़ियों के चेसिस नंबर और इंजन नंबर चोरी की गई गाड़ियों पर पंच कर देते थे। इसके बाद आरटीओ (RTO) कार्यालय के कुछ दलालों की मदद से इन गाड़ियों के फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) और बीमा दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इन फर्जी दस्तावेजों के सहारे ये गाड़ियां बिहार, नेपाल और पूर्वोत्तर राज्यों के ग्राहकों को बहुत कम दामों में बेच दी जाती थीं ताकि किसी को शक न हो। पुलिस अब इन फर्जी आरसी बनाने वाले गिरोह के सदस्यों की तलाश में विभिन्न शहरों में दबिश दे रही है।
बरामदगी और आरोपियों का आपराधिक इतिहास
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से जो 12 गाड़ियां बरामद की हैं, उनमें फॉर्च्यूनर, क्रेटा, ब्रेजा, स्विफ्ट और बलेनो जैसी लोकप्रिय और महंगी गाड़ियां शामिल हैं। इन गाड़ियों की बाजार में कुल कीमत लगभग 1.5 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा पकड़े गए बदमाशों के पास से तीन 315 बोर के अवैध तमंचे, 10 जिंदा कारतूस, छह एंड्रॉइड मोबाइल और 50 हजार रुपये की नकदी बरामद हुई है। गिरफ्तार बदमाशों की पहचान दिल्ली निवासी अमित, हरियाणा निवासी सुमित, संभल निवासी रेहान और इटावा के स्थानीय निवासी मुकेश व राहुल के रूप में हुई है। इन सभी के खिलाफ विभिन्न राज्यों के थानों में चोरी, धोखाधड़ी और आर्म्स एक्ट के दर्जनों मामले पहले से दर्ज हैं।
पुलिस टीम को एसएसपी ने दिया 25 हजार का नकद पुरस्कार
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने इस साहसिक और सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली पुलिस टीम, एसओजी और स्वाट टीम की पीठ थपथपाई है। उन्होंने पूरी टीम को प्रोत्साहित करने के लिए 25 हजार रुपये के नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देने की घोषणा की है। एसएसपी ने कहा कि इस गिरोह के पकड़े जाने से क्षेत्र में वाहन चोरी की घटनाओं पर काफी हद तक लगाम लगेगी। उन्होंने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपने वाहनों में जीपीएस ट्रैकर के साथ-साथ गियर लॉक और स्टीयरिंग लॉक जैसे पारंपरिक सुरक्षा उपकरणों का भी उपयोग करें ताकि चोरों के लिए वारदात को अंजाम देना मुश्किल हो सके। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।