फिरोजाबाद कांच उद्योग को मिलेगी नई ऊर्जा: गेल इंडिया ने शुरू किया गैस पाइपलाइन विस्तार का काम, छोटे उद्यमियों को मिलेगी विशेष सब्सिडी
फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले को पूरी दुनिया में ‘सुहाग नगरी’ और कांच उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। यहाँ का चूड़ी और कांच उद्योग सदियों पुराना है और लाखों लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है। हाल ही में इस कांच उद्योग को बढ़ावा देने और पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल इंडिया) ने क्षेत्र में प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के विस्तार का काम बड़े स्तर पर शुरू कर दिया है। इस पहल से न केवल गैस की उपलब्धता आसान होगी बल्कि कांच कारखानों को स्वच्छ ईंधन भी मिल सकेगा। इसके साथ ही सरकार ने छोटे और कुटीर कांच उद्यमियों को प्राकृतिक गैस की खरीद पर विशेष सब्सिडी देने का भी ऐलान किया है जिससे उद्यमी काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।
प्राकृतिक गैस आपूर्ति में सुधार के लिए गेल इंडिया का नया कदम
गेल इंडिया के अधिकारियों के अनुसार, फिरोजाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों जैसे कि शिकोहाबाद रोड, राजा का ताल, और टूंडला औद्योगिक क्षेत्र में पुरानी पाइपलाइन नेटवर्क को अपग्रेड किया जा रहा है। इसके तहत कई किलोमीटर लंबी नई गैस पाइपलाइन बिछाई जा रही है जिससे गैस का दबाव स्थिर रहेगा और कारखानों को चौबीसों घंटे बिना किसी रुकावट के गैस मिल सकेगी। पहले गैस सप्लाई में बार-बार दबाव कम होने से कांच की ढलाई और चूड़ियों की सिकाई में बाधा आती थी जिससे माल खराब हो जाता था और उद्यमियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। इस नई पाइपलाइन से यह समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी और कांच के उत्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
छोटे और मध्यम कांच उद्यमियों के लिए सब्सिडी योजना
फिरोजाबाद कांच उद्योग में बड़े कारखानों के साथ-साथ हजारों छोटे और कुटीर उद्योग भी शामिल हैं जो मुख्य रूप से हाथ से चूड़ियां बनाने और उनकी डिजाइनिंग का काम करते हैं। इन छोटे उद्यमियों के लिए गैस की बढ़ी कीमतें हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रही हैं। इसे ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग ने संयुक्त रूप से एक सब्सिडी योजना तैयार की है। इस योजना के तहत छोटे कांच कारखानों को गैस के मासिक बिल पर 15 से 20 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी। यह सब्सिडी सीधे उद्यमियों के बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से ट्रांसफर की जाएगी। इस कदम से छोटे व्यवसायी भी कोयले और लकड़ी के पारंपरिक भट्टियों को छोड़कर पर्यावरण के अनुकूल प्राकृतिक गैस की भट्टियों को अपना सकेंगे जिससे उनकी उत्पादन लागत कम होगी और बाजार में वे बड़े उद्योगों के साथ प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे।
पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में मिलेगी बड़ी मदद
फिरोजाबाद का कांच उद्योग ताज ट्रैपेज़ियम जोन (TTZ) के अंतर्गत आता है जिसके कारण यहाँ पर्यावरण संबंधी कड़े नियम लागू हैं। अतीत में कोयले और फर्नेस ऑयल (Furnace Oil) के उपयोग के कारण सुहाग नगरी में वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया था जिससे ऐतिहासिक ताज महल की सुंदरता पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार कोयला भट्टियों को बंद कर गैस आधारित भट्टियां लगाना अनिवार्य कर दिया गया था। अब गैस पाइपलाइन का विस्तार होने और छोटे उद्यमियों को सब्सिडी मिलने से बचे हुए कुटीर उद्योग भी पूरी तरह से गैस पर शिफ्ट हो जाएंगे। इससे क्षेत्र के प्रदूषण स्तर में भारी गिरावट आएगी और हवा की गुणवत्ता में सुधार होगा जिससे स्थानीय नागरिकों का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।
चूड़ी और कांच कला उद्योग के आधुनिकीकरण को मिलेगी रफ्तार
इस गैस विस्तार परियोजना से फिरोजाबाद के कांच हस्तशिल्प और चूड़ी कला के आधुनिकीकरण को भी पंख मिलेंगे। स्वच्छ गैस के उपयोग से कांच पिघलाने की प्रक्रिया अधिक नियंत्रित होती है जिससे कांच के नए और जटिल डिजाइनर खिलौने, झूमर, सजावटी सामान और विभिन्न आकृतियों वाली कलात्मक चूड़ियों का निर्माण आसानी से किया जा सकता है। उद्यमियों का कहना है कि स्थिर गैस आपूर्ति से वे नई ऑटोमैटिक मशीनों का उपयोग कर सकेंगे जिससे उत्पादन क्षमता दोगुनी हो जाएगी। आधुनिक मशीनों और स्वच्छ गैस के मेल से फिरोजाबाद का कांच उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चीनी और यूरोपीय कांच उत्पादों को कड़ी टक्कर दे सकेगा।
उद्यमियों में खुशी की लहर, रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद
गेल इंडिया की इस पहल और सरकार की सब्सिडी घोषणा का फिरोजाबाद ग्लास Industries एसोसिएशन ने स्वागत किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि लंबे समय से उद्योगपति गैस पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार की मांग कर रहे थे। गैस आपूर्ति सुनिश्चित होने से बंद पड़े कई छोटे कारखाने फिर से शुरू हो सकेंगे जिससे हजारों कुशल और अकुशल श्रमिकों को फिर से रोजगार मिलेगा। स्थानीय युवाओं को भी नए स्टार्टअप शुरू करने का मौका मिलेगा। प्रशासन का अनुमान है कि इस परियोजना के पूर्ण रूप से चालू होने के बाद क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 20,000 से अधिक नए रोजगार के अवसरों का सृजन होगा जिससे जिले की आर्थिक स्थिति में भारी सुधार होगा।