फिरोजाबाद में जलभराव की समस्या से जल्द मिलेगी मुक्ति: नगर निगम ने तैयार की 45 करोड़ की ड्रेनेज महायोजना, तीन प्रमुख नालों का होगा कायाकल्प
फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद शहर में हर साल मानसून के आते ही सड़कों पर पानी भर जाने और जलभराव की भीषण समस्या से स्थानीय नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शहर के कई मुख्य बाजार और आवासीय कॉलोनियां बारिश के पानी में डूब जाती हैं जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो जाता है और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इस चिरलंबित समस्या के स्थायी समाधान के लिए फिरोजाबाद नगर निगम ने एक महत्वाकांक्षी ‘ड्रेनेज महायोजना’ तैयार की है। लगभग 45 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत शहर के तीन सबसे महत्वपूर्ण और बड़े नालों का जीर्णोद्धार किया जाएगा जिससे बारिश के पानी की निकासी तेजी से हो सकेगी और शहरवासियों को जलभराव से मुक्ति मिलेगी।
बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या से त्रस्त है सुहाग नगरी
फिरोजाबाद शहर का भौगोलिक ढांचा कुछ ऐसा है कि यहाँ के निचले इलाकों में बारिश का पानी बहुत जल्दी जमा हो जाता है। शहर की जल निकासी व्यवस्था काफी पुरानी हो चुकी है और आबादी बढ़ने के साथ-साथ नालों की क्षमता में सुधार नहीं किया गया। गांधी पार्क, रेलवे स्टेशन रोड, सुभाष चौराहा और शीतल खां जैसे व्यस्त इलाकों में थोड़ी सी बारिश के बाद ही दो से तीन फीट तक पानी जमा हो जाता है। जलभराव के कारण न केवल राहगीरों और वाहन चालकों को मुश्किल होती है, बल्कि स्थानीय व्यापारियों का माल भी दुकानों में पानी घुसने के कारण खराब हो जाता है। इसके अलावा जलभराव के दिनों में मच्छरों के पनपने से डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति काफी रोष था।
नगर निगम की 45 करोड़ रुपये की नई ड्रेनेज कार्ययोजना
नगर आयुक्त ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि शासन द्वारा इस विशेष जल निकासी परियोजना के लिए 45 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर दिया गया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहर के ड्रेनेज सिस्टम को आधुनिक बनाना और पानी की निकासी को सुचारू करना है। परियोजना के अंतर्गत नालों की गहराई बढ़ाई जाएगी और उनके किनारों पर आरसीसी (RCC) की पक्की दीवारें बनाई जाएंगी ताकि मिट्टी ढहने से नाले बंद न हों। पूरी कार्ययोजना को सिंचाई विभाग और जल निगम के तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में क्रियान्वित किया जा रहा है जिससे गुणवत्ता और समय सीमा का पूरा ध्यान रखा जा सके।
तीन बड़े नालों का चौड़ीकरण और पक्कीकरण कार्य
इस महायोजना के प्रथम चरण में शहर के तीन प्रमुख नालों – कबीर नगर नाला, रामगढ़ नाला और बाईपास नाला – का कायाकल्प किया जाएगा। ये तीनों नाले पूरे शहर के पानी को समेटकर मुख्य नदी और बड़े तालाबों तक ले जाते हैं। वर्तमान में कचरा जमा होने और सिल्ट (कीचड़) जमा होने के कारण इनकी जल धारण क्षमता आधी से भी कम रह गई है। नगर निगम इन तीनों नालों की पोकलेन मशीनों के माध्यम से पूरी तरह सफाई कराएगा और उनके चौड़ीकरण का कार्य करेगा। इसके साथ ही इन नालों के ऊपर लोहे के जाल लगाए जाएंगे ताकि लोग उनमें प्लास्टिक और अन्य ठोस कचरा न फेंक सकें, जिससे भविष्य में नाले चोक होने की समस्या न हो।
तकनीकी सर्वे के आधार पर हटेंगे अवैध अतिक्रमण
नालों की सफाई और चौड़ीकरण के काम में सबसे बड़ी बाधा उनके आस-पास किए गए अवैध निर्माण और अतिक्रमण हैं। शहर के कई हिस्सों में लोगों ने नालों के ऊपर दुकानें, पक्के चबूतरे और यहाँ तक कि मकान भी बना लिए हैं। नगर निगम ने राजस्व विभाग के साथ मिलकर एक संयुक्त जीपीएस (GPS) तकनीकी सर्वे शुरू किया है जिससे नालों की वास्तविक चौड़ाई और अतिक्रमण की पहचान की जा रही है। नगर आयुक्त ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चिन्हित किए गए सभी अवैध निर्माणों को ढहाया जाएगा और दोषी लोगों के खिलाफ जुर्माना भी लगाया जाएगा। प्रशासन ने भू-माफियाओं को अपने अवैध कब्जे स्वतः हटा लेने की हिदायत दी है।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने जताई संतोषजनक प्रतिक्रिया
नगर निगम की इस बड़ी पहल का स्थानीय नागरिकों, व्यापार मंडलों और पार्षदों ने स्वागत किया है। स्थानीय व्यापार मंडल के अध्यक्ष ने कहा कि यदि यह परियोजना समय पर पूरी हो जाती है तो व्यापारियों को हर साल होने वाले करोड़ों रुपये के नुकसान से बचाया जा सकेगा। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बरतने के लिए एक नागरिक निगरानी समिति का गठन किया जाना चाहिए ताकि भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न रहे। नगर निगम ने भरोसा दिलाया है कि कार्य की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी और मानसून से पहले मुख्य काम पूरे कर लिए जाएंगे ताकि इस बार बारिश में जनता को परेशानी न हो।