मथुरा में यमुना शुद्धिकरण और घाटों के सौंदर्यकरण की नई कार्ययोजना शुरू: श्रद्धालुओं को मिलेगा स्वच्छ वातावरण
कालिंदी की स्वच्छता के लिए महाअभियान
भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थली मथुरा-वृंदावन में पतित पावनी मां यमुना की स्वच्छता और पवित्रता को बहाल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से एक नई और महत्वाकांक्षी कार्ययोजना शुरू की गई है। नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत मथुरा के विभिन्न नालों को टैप करने (बंद करने) और उनके गंदे पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) तक पहुंचाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) के कड़े निर्देशों के बाद स्थानीय प्रशासन ने यमुना में सीधे गिरने वाले कचरे पर पूरी तरह से रोक लगा दी है और दोषी संस्थाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया है।
घाटों का कायाकल्प और सौंदर्यीकरण
मथुरा के विश्राम घाट, स्वामी घाट और बंगाली घाट समेत सभी प्रमुख ऐतिहासिक घाटों के जीर्णोद्धार का काम शुरू हो चुका है। इन घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए नई चेंजिंग रूम सुविधाएं, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, आधुनिक शौचालय और बैठने के लिए बेंच स्थापित की जा रही हैं। घाटों के पत्थरों को साफ कर उनके प्राचीन स्वरूप को वापस लाया जा रहा है। सरकार की योजना मथुरा में रिवरफ्रंट के तर्ज पर एक सुंदर और हरित कॉरिडोर विकसित करने की है, जहां शाम को होने वाली प्रसिद्ध यमुना आरती में आने वाले पर्यटकों को एक आध्यात्मिक और आनंदमयी अनुभव प्राप्त हो सके।
जनभागीदारी से ही सफल होगी योजना
जिलाधिकारी ने इस अभियान में स्थानीय नागरिकों, पंडा समाज और स्वयंसेवी संस्थाओं से बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है। यमुना के किनारे पॉलीथिन और प्लास्टिक सामग्री के उपयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है और पकड़े जाने पर भारी जुर्माने की घोषणा की गई है। प्रशासन का मानना है कि केवल सरकारी प्रयासों से यमुना स्वच्छ नहीं हो सकती, इसके लिए प्रत्येक नागरिक को जागरूक होना होगा। इस योजना के पूरा होने से मथुरा आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुंदर वातावरण मिलेगा।